आज सबेरे जब काम पर
निकल रहा था तो लगा की कोई रोक लेगा मुझको ! आटा सने हाथ लिए माँ रसोई से निकलेगी
! एक वही थी जो मेरी हर बात को बिना कहे समझ जाती थी ! मैं देखता रहा रसोई की तरफ
वहाँ कोई ना था !
पर अब कोई नहीं होता
तन्हाई में सन्नाटो से ही तो बाते होती है , अब कोई नहीं कहता पानी बैठ कर पिया
करो , खाना जल्दी में मत खाया करो , अब नज़र नहीं उतारी जाती ! अब कोई नहीं कहता
बाईक धीरे चलाना , ठीक से रहना, घर समय पर आ जाना !
मैं कहता रहता हर
बात पर टोका ना करो मम्मी , पर आज जब देर से जगता हूँ तो सोचता हू कोई टोकता क्यों
नहीं ! आज जो मर्जी हो करता हू पर मर्ज़ी नहीं होती !
देर से घर जाने पर कोई
बहाने नहीं सुनता , दोस्तों के साथ जाने पर ताने नहीं देता , अब कोई नहीं कहता तुम
कब सुधरोगे बड़े हो गए हो क्यों नहीं समझते ! गुस्से में भी तू सदा खुश रहे ही दुआ
नहीं दी जाती ! अब मेरी बलाए नहीं ली जाती !
खुशकिस्मत है वो लोग
जिनकी माँ साथ है !
मैं तो बेटा होने का
फ़र्ज़ निभा आया जो मुह मुझे चुमते थकती ना थी उसे अपने ही हाथो से जला आया ! बरसो
बीत गए पर मरने के बाद भी वो मुस्कराता चेहरा याद है जैसे कह रही हो बेटा खुश रहना
हस्ते रहना !
यु तो ज़माने के साथ
हस लेता हूँ हँसा लेता हूँ !
यु कर के ये करता
हूँ की अपना दर्द छुपा लेता हूँ !
Awesome
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