Monday, 8 July 2013

याद ..................



आज सबेरे जब काम पर निकल रहा था तो लगा की कोई रोक लेगा मुझको ! आटा सने हाथ लिए माँ रसोई से निकलेगी ! एक वही थी जो मेरी हर बात को बिना कहे समझ जाती थी ! मैं देखता रहा रसोई की तरफ वहाँ कोई ना था !

पर अब कोई नहीं होता तन्हाई में सन्नाटो से ही तो बाते होती है , अब कोई नहीं कहता पानी बैठ कर पिया करो , खाना जल्दी में मत खाया करो , अब नज़र नहीं उतारी जाती ! अब कोई नहीं कहता बाईक धीरे चलाना , ठीक से रहना, घर समय पर आ जाना !

मैं कहता रहता हर बात पर टोका ना करो मम्मी , पर आज जब देर से जगता हूँ तो सोचता हू कोई टोकता क्यों नहीं ! आज जो मर्जी हो करता हू पर मर्ज़ी नहीं होती !
देर से घर जाने पर कोई बहाने नहीं सुनता , दोस्तों के साथ जाने पर ताने नहीं देता , अब कोई नहीं कहता तुम कब सुधरोगे बड़े हो गए हो क्यों नहीं समझते ! गुस्से में भी तू सदा खुश रहे ही दुआ नहीं दी जाती ! अब मेरी बलाए नहीं ली जाती !
खुशकिस्मत है वो लोग जिनकी माँ साथ है !
मैं तो बेटा होने का फ़र्ज़ निभा आया जो मुह मुझे चुमते थकती ना थी उसे अपने ही हाथो से जला आया ! बरसो बीत गए पर मरने के बाद भी वो मुस्कराता चेहरा याद है जैसे कह रही हो बेटा खुश रहना हस्ते रहना !

यु तो ज़माने के साथ हस लेता हूँ हँसा लेता हूँ !
यु कर के ये करता हूँ की  अपना दर्द छुपा लेता हूँ !

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