Saturday, 20 July 2013

प्रपोज

सोच रहा था की अगर मुझे किसी लड़की  को प्रपोज करना पड़े तो कैसे करुगा !

ये भी सच है की प्रपोज करने के लिए सोचने की क्या जरुरत है ,. जरुरत तो है बॉस एक तो मेरी ऐसी उम्र रही नहीं की टाइम पास की जाय , अब तो अगर होनी है तो फूल एंड फाइनल ही होनी है !

प्रेम का फूल एंड फ़ाइनल मीन्स प्रेमिका का पत्नी हो जाना , और पत्नी का हार्डडिस्क इतना तगड़ा होता है की प्रपोज में कही हुई बातों को जीवन भर याद रखती है ,

,अब भोला आदमी जज्बात में बह कर कुछ बोंल गया तो उसे याद रखने की क्या जरुरत है !

वैसे तो प्रपोज में कही जाने वाली बाते है :-
# झील सी आंखे है तेरी – मुझे तो तैरना नहीं आता तो झील समझ के उसमे उतरु कैसे !
# आंखे नशीली  - नशे में बहक गए तो , ऐसे ही कुछ लोग पियाक्कर समझते है !
# रेशम से बाल – ये रेशम खाने में मिलने पर पता चलता है ! फिर पता चलता है रेशम क्यों कहा !
# होठ रसीले – गर्ल फ्रेंड जब तक चुप तो रस मीठे रहते है मुह खोला तो मिर्ची का जूस !
# हिरनी सी चाल – अब लडकी चार पैरों पर चलते हुए कैसी नज़र आयगी ! और दो पैरों से कोई हिरनी सी कैसे चल सकती है !

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