एक अंतरास्ट्रीय प्रश्न है की --
" आज खाने में क्या बनेगा "
रोज यक्ष प्रश्न की तहर सामने खडी हो जाती है , रोटी तो कॉमन है ! सबाल
सब्जी का है अपनी औकात और स्वाद के बीच ये निर्णय लेना होता है की कौन सी
सब्जी बनायीं जाय !
यही वो सबाल
भी है जिसके माध्यम से पत्नी दिन भर में एक बार पति की बेजती का ओरयेंटेसन
करती है , पति को उसकी औकात बताती है की बड़े पति बने फिरते हो , तुम्हारी
औकात इतनी नहीं की अपनी पसंद की सब्जी खा सको !
अब हम जैसे कुवारे की हालत तो ऐसी है "नंगा नहायगा क्या और निचोरेगा क्या "
खैर उनकी तो सिर्फ बेजती से काम चल जाती है हमें तो बनाना भी पड़ता है !
आज तो सब्जी खरीदते हुए गजब हो गया मैंने बड़ी हिम्मत करके टमाटर का भाव
पुछ लिया ! सब्जी वाली ने पहले तो ऊपर से निचे तक घूरा , फिर बताया 8 रूपये
के सौ ग्राम , मनो कहा हो इससे ज्यादा तो लेने की हेसियत तेरी लगती नहीं
!
मुझे तो इस बात का डर था की कही भाव पूछने के 2 रूपये ना माग ले !
सच में यार इतनी बेइजती तो तब भी महसूस नहीं हुए थी जब गर्ल फ्रेंड भैया कह के निकल गयी थी !
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