Saturday, 1 June 2013

डरना जरुरी है


किसी  का खौफ दिल पर,आजतक तारी न हो पाया !
किया यो प्यार अपनों ने तो लगा डरना जरुरी है !!

अक्सर लोगो को कहते सुना है" जो डर गया वो मर गया " ! मेरे हिसाब से डरना जरुरी है ,अगर एक डर शब्द  जीवन से निकल जाय तो पुरे जीवन को असंतुस्ट  कर समूचे वातवरण को असंतुलित कर देगा जससे मानवता खतरे में पड़ सकती है !

रामचरित मानस में तुलसीदास ने लिखा है " भय बिन होत न प्रीती"

जो सही भी लगता है अगर भय न हो तो प्यार नहीं हो सकता ! भय ही है जो संसार में आपसी प्रेम को  जोडे हुए है !



भय प्रेम का ही दूसरा रूप है, इसलिए हर बात की व्याख्या जो प्रेम से की जा सकती है, वह भय से भी की जा सकती है.



भय अतीत का एक चिह्न है जो वर्तमान में भविष्य दर्शाता है. या तो संत को नहीं होता या फिर  मुर्ख को अन्यथा हर अवस्था में भय होता है ! संसार को व्यस्थित करने के लिए भय आवश्यक है !

मृत्यु का भय जीवन की रक्षा करता है !

गलती  का भय सही राह पर रखता है !

बीमारी  का भय स्वक्ष्ता को प्रोत्साहित करता है !

दुःख  का भय नेकी के मार्ग पर रखता है !


जब व्यक्ति भय को स्वीकार नहीं करते, वे अहंकारी हो जाते हैं,
भय को मिटाने का प्रयास नहीं करना चाहिए - केवल ध्यान रखना चाहिए या तो मैं या  कोई भी नहीं.. 

 



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