आत्महत्या कोई भी कर सकता है कामयाब प्रोफेसनल से लेकर कर्ज चुकाने में नाकामयाब किसान तक रोजाना आत्महत्या कर रहे है ,शहर में अकेला पन जिन्दगिया लील रही है !प्रेम में नाकाम लोगो को तो जेक पोर्ट की तरह दिखती है आत्महत्या ! अभी तो रिजल्ट निकले है तो आत्महत्या का पिक सीजन चल रहा है !
यानि जो कही न कही खुद को नाकाम समझ रहे है , वो आत्महत्या की राह चुनते है ! लोगो को शोर्ट कट की इतनी आदद पड़ गयी है की जीवन की समस्या से भी पतली गली पकड़ कर निकलना चाहते है !
लेकिन उन्हें क्या कहेगे जो आत्महत्या में भी नाकाम हो जाय ?? वो तो खुद की नजरो में गिरे हुए थे ही भगवान की नजरो से भी गिर गए !
बैचैन मन को चैन मिल जाय ये सोच कर कुछ लोग नींद की गोली खाकर चैन की नींद सोना चाहते है , मारना इतना आसान होता तो इतनी जनसख्या न होती !अब चैन कोई सोने (गोल्ड ) वाला चेन तो है नहीं जो बाज़ार में मिल जाय !
और इसकी क्या गारंटी है की मरने के बाद चैन मिल जाय ! आत्मा तो अमर होती है , हो सकता है की जिस कष्ट से बचने के लिए आत्महत्या की जाय अगले जन्म में वही कष्ट मिले !आपके पास जो था उससे भी गए और समस्या भी बरक़रार रह गयी !
खुद से मुहब्बत उन्हें है ही नहीं किसी और से मुहब्बत करने लायक नहीं ! कम से कम ये तो सोच सकते है की किसी को उसकी जरूरत भी हो सकती है !
मुकम्मल जहा तो किसी को नहीं मिलती ! खुद से बड़ा अपना सहारा कोई नहीं होता ! सबाल ये नहीं की आपको जीत मिली या नहीं सबाल ये है की आपने मैदान तो नहीं छोड़ा!
खुद को आईने के सामने खड़ा कर पूछना चाहिए ,अगर आपकी कोशिश ईमानदार है तो फिर रंज कैसा !
यानि जो कही न कही खुद को नाकाम समझ रहे है , वो आत्महत्या की राह चुनते है ! लोगो को शोर्ट कट की इतनी आदद पड़ गयी है की जीवन की समस्या से भी पतली गली पकड़ कर निकलना चाहते है !
लेकिन उन्हें क्या कहेगे जो आत्महत्या में भी नाकाम हो जाय ?? वो तो खुद की नजरो में गिरे हुए थे ही भगवान की नजरो से भी गिर गए !
बैचैन मन को चैन मिल जाय ये सोच कर कुछ लोग नींद की गोली खाकर चैन की नींद सोना चाहते है , मारना इतना आसान होता तो इतनी जनसख्या न होती !अब चैन कोई सोने (गोल्ड ) वाला चेन तो है नहीं जो बाज़ार में मिल जाय !
और इसकी क्या गारंटी है की मरने के बाद चैन मिल जाय ! आत्मा तो अमर होती है , हो सकता है की जिस कष्ट से बचने के लिए आत्महत्या की जाय अगले जन्म में वही कष्ट मिले !आपके पास जो था उससे भी गए और समस्या भी बरक़रार रह गयी !
खुद से मुहब्बत उन्हें है ही नहीं किसी और से मुहब्बत करने लायक नहीं ! कम से कम ये तो सोच सकते है की किसी को उसकी जरूरत भी हो सकती है !
मुकम्मल जहा तो किसी को नहीं मिलती ! खुद से बड़ा अपना सहारा कोई नहीं होता ! सबाल ये नहीं की आपको जीत मिली या नहीं सबाल ये है की आपने मैदान तो नहीं छोड़ा!
खुद को आईने के सामने खड़ा कर पूछना चाहिए ,अगर आपकी कोशिश ईमानदार है तो फिर रंज कैसा !
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