झूठ बोलने से अगर कौआ काटता होता ... तो बहुत सारे नेता को तो कौवे नोज़ नोज़ के खा गए होते !
अब जाके समझ में आई ये सब अपवाह थी और कुछ नहीं !!!
मतलब कौआ नहीं काटेगा झूठ बोलने पर ...
बचपन में फ़ालतू इतना डर -डर के जिया ...मै भी सोचता था ..की ये कौआ को पता केसे चलता है ..
बड़ा ज्ञानी है ..साला ..मतलब एक कौआ ..दिनभर मेरे पीछे पड़ा रहता है ...झूठ और सच की पड़ताल के लिए ...
जिन्दगी नरक बना रक्खी थी साले ने ..पूरा बचपन काला कर दिया ..कौए ने ...अब पछता रहा हु ...
काश ये कला बचपन में निडरता से अपना लेता तो
....आज बहुत बड़ा वाला "बाबा" होता .
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