एक शादीसुदा मित्र से बात हो रही थी , उसने कहा अकेले जीना भी कोई जीना है शादी करनी ही चाहिए ! मैंने भी सोचा मौका अच्छा है थोडी जेनरल नालेज भी बढ़ जायगा सो मैंने मारा मौके पर चौका कहा यार शादी के कुछ फायदे तो बताव !
उसने बताया शादी के बाद कपडे साफ मिल जाते है !
मैंने कहा जब कवारे थे तो गंदे कपडे पहते थे क्या ? !
उसने कहा नहीं जो कपडे पांच दिन पहनते थे वो अब दो दिन में धुल जाते है !
मैंने कहा ये तो गलत बात है जिसे पांच दिन पहना जा सकता था उसे दो दिन में धो कर तो पानी सर्फ़ क्ष्रम खुद की और राष्ट्रीय सम्पति की बर्बादी है !
उसने अगला फायदा बतया खाना समय पर मिल जाता है !
चलो ये मान लेते है मगर यार भूखा कौन रहता है , ये अलग बात है होटल के खाने में स्वाद नहीं होता ये मैं भी मानता हूँ क्युकी भुक्भोगी भी हूँ !
मगर स्वादिस्ट खाने के पहले बाद या कभी कभी साथ भी गाली का स्वाद कैसा होता है ये तो मुझे पता भी नहीं !
खैर उसने मनवा के छोड़ा शादी के फायदे ही फायदे है ! वैसे भी किसी ने बहुत सोच कर ही कहा होगा , "अपना हरा और बीबी का मारा कोई कहता नहीं!
और मानअ लेने में कोई नुकासन भी नहीं था क्योकि अपने बाप का क्या जा रहा था !
उसी दिन रेल पर बैठे तो उस बेचारे के इस गलत फहमी का कारण तब पता चला जब बगलवाली गाड़ी के चलने पर अपनी गाड़ी चलती हुई महशुस हुआ !
जो की भ्रम था और कुछ नहीं ! वो बेचारा भी शायद ऐसे ही किसी भ्रम में है , उसके लिए तो बस दुआ कर सकता हूँ की वो जिंदगी भर सामने वाली दूसरी खिडकी की तरफ न देखे !
उसने बताया शादी के बाद कपडे साफ मिल जाते है !
मैंने कहा जब कवारे थे तो गंदे कपडे पहते थे क्या ? !
उसने कहा नहीं जो कपडे पांच दिन पहनते थे वो अब दो दिन में धुल जाते है !
मैंने कहा ये तो गलत बात है जिसे पांच दिन पहना जा सकता था उसे दो दिन में धो कर तो पानी सर्फ़ क्ष्रम खुद की और राष्ट्रीय सम्पति की बर्बादी है !
उसने अगला फायदा बतया खाना समय पर मिल जाता है !
चलो ये मान लेते है मगर यार भूखा कौन रहता है , ये अलग बात है होटल के खाने में स्वाद नहीं होता ये मैं भी मानता हूँ क्युकी भुक्भोगी भी हूँ !
मगर स्वादिस्ट खाने के पहले बाद या कभी कभी साथ भी गाली का स्वाद कैसा होता है ये तो मुझे पता भी नहीं !
खैर उसने मनवा के छोड़ा शादी के फायदे ही फायदे है ! वैसे भी किसी ने बहुत सोच कर ही कहा होगा , "अपना हरा और बीबी का मारा कोई कहता नहीं!
और मानअ लेने में कोई नुकासन भी नहीं था क्योकि अपने बाप का क्या जा रहा था !
उसी दिन रेल पर बैठे तो उस बेचारे के इस गलत फहमी का कारण तब पता चला जब बगलवाली गाड़ी के चलने पर अपनी गाड़ी चलती हुई महशुस हुआ !
जो की भ्रम था और कुछ नहीं ! वो बेचारा भी शायद ऐसे ही किसी भ्रम में है , उसके लिए तो बस दुआ कर सकता हूँ की वो जिंदगी भर सामने वाली दूसरी खिडकी की तरफ न देखे !
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